https://youtu.be/QHCrwS0FRHk
गुरुवार, 27 मार्च 2025
दांत सुरक्षित रखने का अचूक उपाय
मंगलवार, 25 मार्च 2025
अल्लामा इकबाल का मशहूर शेर
महान षायर अल्लामा इकबाल का एक षेर है-
वो फरेब खुर्दा षाहीं जो पला हो करगसों में
उसे क्या खबर के क्या है राहे रस्मों षाहबाजी
इसके मायने हैं कि बाज का जो बच्चा गलती से गिद्धों के यहां पला हो, उसे क्या खबर कि षाहबाजी के रस्मों रिवाज क्या होते हैं। बताते हैं कि एक बार गलती से किसी बाज का अंडा गिद्धों के अंडों में गिर गया। अंडे से निकला तो गिद्धों के बच्चों की संगत में वैसा ही व्यवहार करने लगा। उसे अहसास ही नहीं कि वह तो बाज का बच्चा है। ज्ञातव्य है कि बाज खुद षिकार करके भोजन करता है, जबकि गिद्ध मृत षरीर का मांस नोंच कर खाता है।
इसकी व्याख्या चैट जपीटी इस प्रकार करता है- जो व्यक्ति हमेशा छल-कपट और चालाकी के माहौल में पला-बढ़ा हो, जैसे गिद्धों के बीच पला हुआ, उसे भला क्या पता कि सच्ची शाही परंपराएं और उच्च मूल्यों की राह क्या होती है। यह शेर सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर एक तीखा कटाक्ष भी हो सकता है, जो यह दर्शाता है कि अगर कोई व्यक्ति केवल धोखे और स्वार्थ से भरे वातावरण में बड़ा हुआ है, तो वह कभी भी सच्चे नेतृत्व, न्याय या शाही शिष्टाचार को नहीं समझ सकता।
जो लोग भ्रष्टाचार और अनैतिकता में डूबे हुए हैं, वे ईमानदारी और नैतिकता के महत्व को नहीं समझ सकते हैं। जो लोग झूठ और धोखे के आदी हैं, वे सच्चाई और विश्वास के मूल्य को नहीं जानते हैं। जो लोग सत्ता और धन के लालच में अंधे हो गए हैं, वे न्याय और समानता के महत्व को नहीं समझते हैं।
रविवार, 16 मार्च 2025
इन्ट्यूषन या टेलीपैथी
शनिवार, 8 मार्च 2025
मैं यह करूंगा, ऐसा कभी नहीं कहता
जैसे यदि किसी ने मुझे कोई निमंत्रण दिया और मुझे जाना ही होगा, यानि जाने का पक्का विचार है तो भी यह नहीं कहता कि मैं आउुंगा। यह कहता हूं कि आने की कोषिष करूंगा, आने का विचार तो है। क्योंकि मैने अपनी डिक्षनरी में से गा, गे, गी हटा दिया है। इस पर कई लोग नाराज हो जाते हैं। कहते हैं कि ऐसा क्यों कह रहे हो। कोषिष और विचार क्या होता है, आपको आना ही है। इस पर मुझे उनको समझाना पडता है कि मैं यह नहीं कह पाउंगा कि मैं आउंगा, क्योंकि जब भी मैंने ऐसा कहा है कि मैं आउुंगा तो मैं नहीं जा पाता हूं। न जाने क्यों? न जाने कौन सी षक्ति मुझे रोक देती है। न जाने कौन रुकावट डालता है। जिन मित्रों को मेरी आदत का पता है, फिर भी वे यदि गलती से कह देते हैं कि कल तो आप वहां जाओगे, मुझे एकदम से गुस्सा आ जाता है। कहता हूं कि जब आपको पता है, फिर भी आप ऐसी हरकत क्यों कर रहे हैं? वे कहते हैं आपने थोडे ही कहा है कि आप जाओगे, यह तो हम कह रहे हैं, तब भी कहता हूं आपका वक्तव्य भी मेरे लिए बाधा जाता है। इसलिए यह कहो कि कल आपका वहां जाने का विचार है ना। यह तो हुई कुछ करने के विशय में वक्तत्व की बात, व्यवहार में भी मैने यह देखा है कि जब तक कोई छोटा मोटा काम हो नहीं जाता, उसके बारे में सुनिष्चित नहीं रह पाता कि हो ही जाएगा। इसे यूं समझिये कि मुझे जयपुर जाना है तो तब तक पक्का न समझिये जब तक कि बस में न बैठ जाउं। इससे भी छोटे काम। मानसिकता यह बन गई है कि किसी छोटे से काम के लिए निकलता हूं तो पहले से संषय रहता है कि वह हो भी पाएगा या नहीं। जैसे जब मोबाइल का रिचार्ज करवाने जा रहा हूं, एटीएम से रुपये निकलवाने जा रहा हूं, कोई बिल जमा करवाने जा रहा हूं, बैंक में रुपए जमा करवाने जा रहा हूं तो संदेह रहता है कि हो पाएगा या नहीं। फिर सोचता हूं कि प्रकृति चाहेगी तो हो जाएगा। षायह यह संपूर्ण मानिसिकता इस कारण बनी है कि यह धारणा पक्की हो गई कि जो कुछ भी मैं कर रहा हूं, वह मैं नहीं कर रहा, प्रकृति कर रही है या प्रकृति करवा रही है। उसकी मर्जी होगी तो हो जाएगा, नही ंतो नहीं।
मेरे कुछ साथी कहते हैं कि चूंकि आप पहले से संषय में रहते हैं, इस कारण आपके कामों में बाधा आती है। आधे मन से किए जा रहे काम के होने में संषय होना ही है। इसलिए संषय छोड कर पक्का यकीन रखिए, काम हो जाएगा। उनकी राय में दम है, उस पर चलने की कोषिष भी करता हूं, मगर चूंकि हजारों घटनाओं के लंबे अनुभव से जो धारणा भीतर पैठ गई है, वह सोच को बदलने ही नहीं देती।
https://www.youtube.com/watch?v=_kpj_pSgkIY
गुरुवार, 6 मार्च 2025
आदमी झूठ बोल ही नहीं सकता, बोलेगा तो पकडा जाएगा
लाई डिटेक्टर टेस्ट इस प्रकार किया जाता है। व्यक्ति के शरीर से विभिन्न सेंसर जोड़े जाते हैं। पहले सामान्य सवाल पूछे जाते हैं। जैसे आपका नाम क्या है? आपके पिताजी का नाम क्या है? ताकि बेसलाइन डेटा मिल सके। फिर ऐसे सवाल पूछे जाते है, जिनका जवाब झूठ या सच हो सकता है। मशीन व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करती है और यह देखा जाता है कि किसी विशेष सवाल पर असामान्य बदलाव आया या नहीं। हालांकि यह सही है कि लाई डिटेक्टर पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं होता। कई लोग घबराहट की वजह से भी असामान्य प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं, जिससे गलत नतीजे आ सकते हैं। साथ ही कुछ प्रशिक्षित लोग या अपराधी इसे चकमा भी दे सकते हैं। वस्तुतः लाई डिटेक्टर का उपयोग पुलिस इन्वेस्टिगेशन में किया जाता है। अपराध की जांच में संदिग्ध से पूछताछ करने के लिए।
कुछ एजेंसियां इसे भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल करती हैं। हालांकि अदालतों में लाई डिटेक्टर टेस्ट के नतीजों को आमतौर पर पुख्ता सबूत नहीं माना जाता।
शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025
मैं अजमेरीलाल हूं
कभी भोला नजर आता हूं तो कभी चतुर। षाबाषी दीजिए कि चंट-चालाक-कुटिल नहीं हूं। सज्जन हूं। सदाषयी हूं। दयालु हूं। सहृदय हूं। मदद को तत्पर। कोराना काल में यह साबित कर चुका हूं। कुल जमा बहुत प्यारा हूं। मुझे अपने आप से बहुत प्यार है। जरा गौर करेंगे तो मेरे जैसे अजमेरी लालों के चेहरे आपकी दिमागदानी में घूमने लग जाएंगे। काष मुझे चंबल का पानी पीने को मिल जाए।
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025
क्या सिंधियों के लिए इष्ट देव झूलेलाल की सवारी पल्ले का सेवन उचित है?
https://youtu.be/FCed4_0FczA
दांत सुरक्षित रखने का अचूक उपाय
दोस्तो, नमस्कार। पिचहत्तर साल तक भी चुस्त दुरूस्त एक सज्जन ने कुछ वर्श पहले खुद के अनुभव के आधार पर यह बात साझा की थी कि अगर आप चाहते हैं कि...

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भारतीय संस्कृति में सभी कार्य शुभ मुहूर्त में ही करने की परंपरा है। ऐसा कार्य की सफलता के लिए किया जाता है। इसके प्रति लोगों में गहरी आस्था ...
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एक कहावत आपने सुनी होगी- अपनी गली में तो कुत्ता भी शेर होता है। वो इसलिए कि वह खुद को अपनी गली का राजा मानता है। किसी भी अन्य कुत्ते, सूअर, ...
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तेजवानी गिरधर अंतर्ध्यान शब्द के मायने है, अदृश्य होना। इसका उल्लेख आपने शास्त्रों, पुराणों आदि में सुना होगा। अनेक देवी-देवताओं, महामा...