लाई डिटेक्टर टेस्ट इस प्रकार किया जाता है। व्यक्ति के शरीर से विभिन्न सेंसर जोड़े जाते हैं। पहले सामान्य सवाल पूछे जाते हैं। जैसे आपका नाम क्या है? आपके पिताजी का नाम क्या है? ताकि बेसलाइन डेटा मिल सके। फिर ऐसे सवाल पूछे जाते है, जिनका जवाब झूठ या सच हो सकता है। मशीन व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करती है और यह देखा जाता है कि किसी विशेष सवाल पर असामान्य बदलाव आया या नहीं। हालांकि यह सही है कि लाई डिटेक्टर पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं होता। कई लोग घबराहट की वजह से भी असामान्य प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं, जिससे गलत नतीजे आ सकते हैं। साथ ही कुछ प्रशिक्षित लोग या अपराधी इसे चकमा भी दे सकते हैं। वस्तुतः लाई डिटेक्टर का उपयोग पुलिस इन्वेस्टिगेशन में किया जाता है। अपराध की जांच में संदिग्ध से पूछताछ करने के लिए।
कुछ एजेंसियां इसे भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल करती हैं। हालांकि अदालतों में लाई डिटेक्टर टेस्ट के नतीजों को आमतौर पर पुख्ता सबूत नहीं माना जाता।
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