शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

हम कुछ याद करते वक्त सिर क्यों खुजाते हैं?

आम तौर पर जब भी हम कुछ सोचते या याद करते वक्त सिर खुजाते हैं। यह आदत बहुत साधारण लगती है, लेकिन इसके पीछे दिमाग, शरीर और मनोविज्ञानक, तीनों की मिली-जुली भूमिका होती है। मान्यता है कि जब हम कुछ याद करते या गहराई से सोचने लगते हैं, तो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और तंत्रिका गतिविधि बढ़ जाती है। सिर की त्वचा में हल्की-सी संवेदना पैदा होती है, जिसे हम अनजाने में खुजली या झुनझुनी के रूप में महसूस करते हैं। सिर खुजाना एक तरह का “फोकस जेस्चर” है। जैसे कोई पेन घुमाता है या उंगलियां चटकाता है, वैसे ही यह क्रिया दिमाग को संकेत देती है कि “अब सोचना है”। कुछ याद नहीं आ रहा होता या दिमाग अटका हुआ होता है, तो हल्का तनाव पैदा होता है। सिर खुजाना उस तनाव को निकालने का एक स्वतःस्फूर्त तरीका बन जाता है। सिर पर हल्का-सा स्पर्श दिमाग को एक छोटा “झटका” देता है, जिससे अटकी हुई स्मृति या विचार को निकलने में मदद मिलती है। इसे यूं कहा जा सकता है कि जब “दिमाग के पहिए जाम हो जाएं, तो हाथ जाकर सिर पर लग जाता है, ताकि पहिये चलायमान हों।” आपको यह भी ख्याल में होगा कि सभी लोग सिर नहीं खुजाते, कुछ लोग ठुड्डी सहलाते हैं, कुछ नाक छूते हैं, कुछ आँखें बंद कर लेते हैं। यानि तरीका अलग-अलग, मगर उद्देश्य एक ही कि सोच को सक्रिय किया जाए।

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